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Sunday, August 28, 2016

सपना पूरा करने के लिए 5 लाख रुपए की जर्मन राइफल खरीद कर भेंट की..

गुजरात के अहमदाबाद के एक रिक्शा ड्राइवर ने अपनी बेटी का शूटिंग चैंपियन बनाने का सपना पूरा करने के लिए 5 लाख रुपए की जर्मन राइफल खरीद कर भेंट की है। अहमदाबाद के रहने वाले रिक्शा चालक मणिलाल गोहिल ने ये रुपए अपनी बेटी की शादी के लिए बचा कर रखे थे। आपको बता दें कि मणिलाल की बेटी मित्तल एक राष्ट्रीय स्तर की शूटर है। 


जब मणिलाल स्थानीय पुलिस कमिश्नर के पास लाइसेंस के लिए अप्लाई करने के लिए पहुंचे तो लिस कमिश्नर हैरान रह गए कि एक रिक्शा ड्राइवर इतनी महंगी राइफल कैसे खरीद सकता है।हालांकि, उनके लिए पुलिस ने जरूरी मंजूरी दिलाने में मदद की और मणिलाल के प्रयासों के लिए तारीफ भी की।
रिक्शा चालक की बेटी मित्तल ने कहा, 'मेरे पिता और मेरे परिवार ने सिर्फ मेरे महंगे शौक को पूरा करने के लिए बहुत बलिदान दिया है। इस राइफल के मिलने के बाद मैं अंतर्राष्ट्रीय स्तर में भाग लेने और अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए कड़ी मेहनत करूंगी।' शूटर मित्तल अहमदाबाद के गोमतीपुर क्षेत्र में अपने माता-पिता और दो भाइयों के साथ एक चॉल में रहती है और चार साल से शूटिंग का अभ्यास कर रही है।
शूटिंग के लिए मित्तल के जुनून का तब जागा वे अहमदाबाद में राइफल क्लब से गुजर रहीं थी वहां पर कुछ निशानेबाजों उस समय निशाना लगा रहे थे। मित्तल ने तभी फैसला कर लिया था कि वह भी उन निशानेबाजों की तरह ही एक निशानेबाज बनेगी। एक ऐसा परिवार जो सिर्फ ऑटो रिक्शा चालक मणिलाल के ऊपर निर्भर है और उस परिवार में इस तरह के महंगे शौक को आसानी से पूरा कर पाना नामुमकिन था। फिर भी मणिलाल ने अपनी बेटी को राइफल खरीद कर दिया ताकि उसके पास अपनी राइफल हो। मित्तल को पहले राइफल क्लब मे किराए पर बंदूक लेनी पड़ता थी।


मित्तल की नई राइफल का वजन 8 किलो और एक गोली की कीमत 31 रुपए है। मित्तल अगर किसी भी टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए कम से कम 1000 राउंड गोलियां जरुरत पड़ेगी। 2013 में कम से कम अभ्यास होने के बावजूद मित्तल ने 57वें अखिल भारतीय राष्ट्रीय चैंपियनशिप शूटिंग में भाग लिया और साथीनिशानेबाजों अंजू शर्मा और लज्जा गोस्वामी के साथ-साथ एक कांस्य पदक जीता था।
शूटिंग मित्तल की पहला जुनून नहीं था। उनका सपना था कि भारतीय सेना में शामिल हो, लेकिन उसकी कम ऊंचाई होने के चलते ऐसा नहीं हो सका। मित्त्ल ने पीएसआई की परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन उसके शारीरिक कद कम होने के कारण सेना में शामिल नहीं हो सकती थी। मित्तल का छोटा भाई मितेश भी एक पिस्तौल शूटर के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए कोशिश कर रहा है।

Thursday, May 12, 2016

एक कर्ज.....

दोस्तों ये कहानी जरूर पढ़े......
पिताजी के अचानक आ धमकने से पत्नी तमतमा उठी-- “लगता है, बूढ़े को पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है, वर्ना यहाँ कौन आने वाला था! अपने पेट का गड्ढ़ा भरता नहीं, घरवालों का कहाँ से भरोगे? मैं नज़रें बचाकर दूसरी ओर देखने लगा।.....
पिताजी नल पर हाथ-मुँह धो कर सफ़र की थकान दूर कर रहे थे।इस बार मेरा हा्थ कुछज्यादा ही तंग हो गया। बड़े बेटेका जूता फट चुका है।वह स्कूल जाते वक्त रोज भुनभुनाता है। पत्नी के इलाज के लिए पूरी दवाइयाँ नहीं खरीदी जा सकीं।
बाबूजी को भी अभी आना था। घर में बोझिल चुप्पी पसरी हुई थी। खाना खा चुकने पर पिताजी ने मुझे पास बैठने का इशारा किया। मैं शंकित था कि कोई आर्थिक समस्या लेकर आये होंगे।
पिताजी कुर्सी पर उकड़ू बैठ गए। एकदम बेफिक्र। सुनो कहकर उन्होंने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा। मैं सांस रोकर उनके मुँह की ओर देखने लगा। रोम-रोम कान बनकर अगला वाक्य सुनने के लिए चौकन्ना था।



वे बोले, “खेती के काम में घड़ी भर भी फुर्सत नहीं मिलती। इस बखत काम का जोर है।रात की गाड़ी से वापस जाऊँगा। तीन महीने से तुम्हारी कोई चिट्ठी तक नहीं मिली। जब तुम परेशान होते हो, तभी ऐसा करते हो।" उन्होंने जेब से
सौ-सौ के दस नोट निकालकर मेरी तरफ बढ़ा दिए, “रख लो। तुम्हारे काम आएंगे। धान की फसल अच्छी हो गई थी। घर में कोई दिक्कत नहीं है।तुम बहुत कमजोर लग रहे हो। ढंग से खाया-पिया करो। बहू का भी ध्यान रखो।" 
मैं कुछ नहीं बोल पाया।शब्द जैसे मेरे हलक में फंसकर रह गये हों। मैं कुछ कहता इससे पूर्व ही पिताजी ने प्यार से डांटा, “ले लो। बहुत बड़े हो गये हो क्या? नहीं तो।" मैंने हाथ बढ़ाया। पिताजी ने नोट मेरी हथेली पर रख दिए। 
बरसों पहले पिताजी मुझे स्कूल भेजने केलिए इसी तरह हथेली पर अठन्नी टिका देते थे, पर तब मेरी नज़रें आज की तरह झुकी नहीं होती थीं।

दोस्तों एक बात हमेशा ध्यान रखे माँ बाप अपने बच्चो पर बोझ हो सकते हैं बच्चे उन पर बोझ कभी नही होते है। कई लोग अपने माँ बाप को वक़्त के साथ समझ नही पाते। क्या वो माँ बाप जिन्होंने आपको जन्म से वो हर सुख-सुविधा दी जो वो दे सकते थे 
या यूँ कहूँ तो उन्होंने उससे ज्यादा दिया, जिस माँ ने आपके लिए रात-रात भर जागकर आपकी देखभाल की उसके लिए आपका कोई फ़र्ज़ नही ? जिस पिता ने दिन रात कड़ी मेहनत किया ताकि आपकी जिंदगी संवर सके पर जब वो काम करने के लायक नही होते तो आपको क्या करना चाहिए ? 



आज मैंने ये पोस्ट इसलिए share की क्युकी मैं अक्सर यह सुनता हूँ कि "यार,पापा को इस बात की समझ नही है कुछ भी बोल देते हैं या कुछ भी करते हैं" और भी न जाने क्या क्या। जिसने आपको इतना बड़ा करके आपके मुकाम तक पंहुचा दिया क्या उसकी समझ आपसे कम हो गयी ? 


दोस्तों समझने की जरुरत हमें हैं। उनकी सबसे बड़ी ख़ुशी आप हैं। आपके जन्म से ही उनकी कुछ उम्मीदें जुड़ जाती हैं आपसे। अगर आपकी girlfriend या boyfriend आपकी उम्मीद तोड़ते हैं तो आपको कैसा लगता है ? 

जरा सोचों उन्होंने तो बचपन से सिर्फ आपसे ही उम्मीद किये बैठे हैं। अगर अब भी ना समझ आई तो बस खुद से इतना पूछ लीजिये कि जब आप इनके उम्र में होंगे तो अपने बच्चों से क्या उम्मीद करेंगे। आप खुद समझ जाएँगे। 

Friday, April 29, 2016

मानवी जीवन का उद्देश

कैसे हम खुश रह सकते है?
एक समय की बात है, 50 लोगो का एक समूह किसी सेमीनार में उपस्थित होने के लिए गया था तभी सेमीनार में अचानक बोलने वाले ने बोलना बिच में ही बंद कर दिया और कुछ सामूहिक मिलकर करने की ठानी. उसने उपस्थित सभी लोगो को एक गुब्बारा देना शुरू किया. जिसपे सभी को एक मार्कर पेन से अपना-अपना नाम लिखना था. और बाद में सभी गुब्बारों को जमा किया गया और एक अलग कमरे में ले जाकर रखा गया और बाद में सभी को उसी कमरे में भेजा गया और सभी को अपने-अपने नाम का गुब्बारा 5 मिनट के अंदर धुंडने को कहा. सभी लोग जल्द से जल्द अपने नाम के गुब्बारे को धुंडने में लगे रहे, एक-दुसरे को धक्का देने लगे, सभी लोग गड़बड़ी करने लगे थे.
5 मिनट के अंत में किसी को भी अपने नाम का गुब्बारा नही मिला था अब सभी से कहा गया था की एक-एक गुब्बारा उठाये और उसपे जिसका भी नाम होंगा उसे वह दे-दे अब 5 मिनट के अंदर ही सभी के पास अपने-अपने नाम का गुब्बारा था.

तभी उसने बोलना शुरू किया – यही गतिविधि हमारे जीवन में भी होने लगी है. हर कोई जल्दबाजी में अपने आस-पास ख़ुशी धुंडने में लगा हुआ है, बल्कि उसे ये पता भी नही होता है की उसे वह ख़ुशी कहा मिलेंगी.
हमारी ख़ुशी दूसरो की ख़ुशी में ही छुपी होती है. आप दूसरो को उसकी ख़ुशी दीजिये, आपको अपनी ख़ुशी अपनेआप ही मिल जाएँगी.
और यही मानवी जीवन का उद्देश है.

सबसे बड़ा रोग क्या काहेंगे लोग..

इस कहावत से यही बात सामने आती हैं की मधुम्ख्खियो को या किसी भी जानवर को इस बात का फर्क नहीं पड़ता की उनके बारे मे बाकी क्या सोचते हैं, पर इन्सान की एक यही आदत सभी समस्याओ की जड़ हैं हमारी सोच की लोग क्या कहेगे, लोग क्या सोचेगे, उनको क्या लगेगा इसी सोच की वजह से हम कुछ भी खुलकर और Confident के साथ नहीं कर पाते. क्योकी हम कोई भी काम करने से पहले दस बार लोगे के बारे मैं सोचते हैं और अगर हम कोई काम करेगे और इसमें हम कामयाब नहीं हो पाये तो मेरे दोस्त, रिश्तेदार, पडोसी, मेरे पहचानवाले मेरे बारेमे क्या सोचेगे इस डर की वजह से हम कोई भी काम करने से कतराते हैं. लेकिन जिंदगी मैं अगर कुछ बड़ा काम करना होगा तो लोगो के बारे मैं सोचना छोड़ देना होगा.
आपको एक कहानी बताता हु…
एक दिन एक आदमी मार्निंग वाक को गया तभी उसने एक गली मैं एक लड़के को कचरा उठाते हुये देखा वहां के दो-चार कुत्ते उस पर भोक रहे थे उस आदमी ने उस लड्के की एक बात गोर की वो भोकते हुये कुत्तो को देखकर उस लड़के के चेहरेपर न कोई डर न उस लड़के का उन कुत्तो पर कोई ध्यान था वह लड़का बस अपना कचरा उठाने का काम कर रहा था वो लड़का वहासे दूसरी गली मैं गया तो दूसरी गली के कुत्ते भी उसे देखकर भोकने लगे वहा पर भी उस लड़के ने कुत्तो की तरफ ध्यान न देकर अपना कचरा उठाने के काम को करता रहा. उस लड़के ने कचरा उठाकर दो-चार  सौ रूपये कमा लिये और भोकने वाले भोकते रहे गये.

तो दोस्तों, यहीं सोच हम हमारी जिंदगी में अपनाये तो हम कभी पिछे नहीं रहगे. और हम अपना काम लोगो की सोच को ध्यान में रखकर नहीं करेगे तो पुरे करेगे. वो कहावत हैं न  ”सुनो सब की करो मन की ”

सर्वश्रेष्ठ शासक

एक बार किसी बड़े देश के राजा ने सर्वश्रेष्ठ शासक के लिए पुरस्कार समारोह करवाने के सोचा तो उसने सभी पडोसी राज्यों के शासकों को न्योता दिया | पडोसी राज्यों के शासक नियत समय पर राजदरबार में आ पहुंचे |
सभी के आ जाने के बाद राजा ने उन सबको अपनी उपलब्धियों के बारे में बताने को कहा |  एक शासक ने कहा उसके राज्य में उसके काल के दौरान उसके राज्य की जो आय है वो दोगुनी हो गयी है |  दूसरे ने बताया उसके राज्य काल के दौरान उसके राज्य में स्वर्ण मुद्रयों के भंडार स्थापित हो गये है |  किसी ने कहा कि उसने अपने शासनकाल के दौरान युद्ध के लिए काम में आने वाले हथियारों की व्यवस्था कर ली है |

इस तरह सभी राज्य के राजाओं ने अपनी अपनी सफलताएँ गिनायीं |  लेकिन अंत में एक राजा ने सकुचाते हुए कहा कि मेरे राज्य में न तो स्वर्ण मुद्रा के कोष में वृद्धि हुई है और न ही ऐसा है कि मेरी आय बढ़ी है और मेने तो अपने राज्य में हथियारों में भी वृद्धि नहीं है क्योंकि मेने अपने राज्य में जनता जो अधिक से अधिक लाभ देने का आदेश दे दिया है इसी वजह से मेरा राजकोष भी कम हो गया है क्योंकि मेने राजकोष का धन अधिक से अधिक पाठशाला खुलवाने और अस्पताल बनवाने में खर्च किया है और मेरे राज्य में वृक्षारोपण पर भी अधिक से अधिक जागरूकता से काम होता है इसलिए मेरा ध्यान राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए गया ही नहीं है |
लेकिन हाँ इतना है कि ये सब करने से मेरे राज्य में युवाओं को रोजगार मिला है और जनता खुश है इसके अलावा मेरी कोई विशेष उपलब्धि नहीं है  |  राजा ने उसे ही विजेता घोषित करते हुए कहा कि असल में तुम ही सच्चे शासक को क्योंकि प्रजा हित से बढ़कर तो कुछ नही है प्रजा को रोजगार के अवसर देना और उसकी जीविका के साधन उपलब्ध करवाना ही प्रजा धर्मं है और तुम श्रेष्ठ हो |

अंतिम इच्छा

एक चोर से हत्या हो गयी सो राजा ने उसे फांसी की सज़ा के लिए दोषी पाया और उसे फांसी सुना दी गयी और उस से उसकी अंतिम इच्छा के बारे में पुछा गया तो उसने अपनी माता से मिलने की इच्छा जाहिर की |
इस पर उसकी माता को दरबार में बुलाया गया | वह अपना मुह अपनी माता के कान के पास ले गया और अपने दांत अपनी माता के कान में गडा दिए | उसकी माता चीत्कार कर उठी तो सभा में मौजूद सभी लोगो ने उसे धिक्कारा और उस से बोला कि तुम्हारे पिता तो कबके जा चुके थे और ये तुम्हारी माता ही थी जिसने बड़े कष्टों के साथ तुम्हे पाल पोसकर बड़ा किया | इसी माँ को तूने अंतिम समय में इतना दर्द दिया है |

इस पर चोर बोला कि इसने मुझे जन्म दिया इस नाते ये मेरी माँ तो अवश्य है लेकिन माँ वो होती है जो जीवन का निर्माण करती है संस्कार देकर संतान का कल्याण सुनिश्चित करती है लेकिन इसने जब मैं बचपन में छोटा था तो बच्चो की पेन्सिल और चीज़े चुरा लिया करता था और घर आने के बाद इसे बताने पर कभी भी मुझे इस काम के लिए मना नहीं किया उल्टा खुश होती थी इसलिए मैं बेधड़क चोरियां करता और फिर चोरी को ही अपना व्यवसाय बना दिया | इसने मुझे मूक समर्थन दिया और कभी भी मुझे नहीं रोका तो मेरा होसला भी बढ़ता गया और मैं बड़ी बड़ी चोरिया भी करने लगा और अब जो मेने हत्या की थी वो भी चोरी के काम में बाधा आने के कारन मुझसे अनजाने में हो गयी |
और चूँकि मेरी माता ने कभी भी मुझे आगामी स्थितयों से मेरा परिचय नहीं करवाया इसलिए मैं किसी भी बुरे काम को अनुचित नहीं मानता था इसलिए मैंने हत्या भी करदी और यही वजह है कि मेरा जीवन समाप्त होने जा रहा है मेरे पास समय नहीं है नहीं तो मैं इस गलती के लिए इसके कान पकड़वाता | इसलिए मेने इसे ये दर्द दिया ताकि अन्य लोग भी इस से शिक्षा लें |

हम उतना ही पाते है जितना किसी दूसरे को देने में हम समर्थ होते है.




एक दिन एक बच्चा अपनी माँ से नाराज हो जाता है तो जब उसे डांट दिया जाता है तो गुस्सा होकर वो घर से बाहर चला जाता है और घर से थोड़ी दूर एक पहाड़ी पर जाकर जोर से चिल्ला  कर बार बार  कहता है कि ” मैं तुमसे नफरत करता हूँ ” तो थोड़ी ही देर बाद उसे अपनी ही प्रतिध्वनी सुनाई देती है तो वो बच्चा जिसे नहीं पता कि ये आवाज क्यों आती है उसे लगता है कि उस तरफ भी कोई है जो उस से यही कह रहा है तो वो डर जाता है वापिस अपनी माँ के पास आकर पूरी बात बताता है तो उसकी माँ समझ जाती है और बच्चे को वापिस उसी पहाड़ी पर लेजाकर कहती है अब तुम ये कहो कि ” मैं तुमसे प्यार करता हूँ ” तो वो फिर वही आवाज गूंजी तो उसकी माँ ने कहा कि देखो तुमने जब ये कहा कि ” मैं तुमसे नफरत करता हूँ” तो सामने से भी तुम्हे यही सुनने को मिला लेकिन जन्हा तुमने अपनी नफरत को प्यार में बदल दिया वन्ही सामने वाले का नजरिया भी तुम्हारे लिए बदल गया |

काल्पनिक रस्सी

एक व्यापारी था जिसके पास उसके अपने पांच ऊँट थे जिन पर सामान लादकर वो शहर शहर घूमता और कारोबार करता था और अपना व्यापार किया करता था | एक बार लौटते हुए रात हो गयी | तो वो रात को आराम करने के लिए एक सराय में रुका और और पेड़ोसे ऊँट को बाँधने की  तैयारी करने लगा | चार ऊँट तो बांध गये लेकिन पांचवे के लिए रस्सी कम पड़ गयी |
उसने जब कोई उपाय और नहीं सूझा तो सराय में मालिक से सहायता मांगने की सोची वो सराय के अंदर जा ही रहा था कि उसे गेट के बाहर एक फ़कीर मिला जिसने व्यापारी से पुछा कि ‘तुम कुछ परेशान लग रहे हो बताओ क्या परेशानी है हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर पाऊं ‘ व्यापारी ने उसे अपनी समस्या बतलाई तो वो बड़े जोर जोर से हसा और फ़कीर ने कहा कि पांचवे ऊँट को भी ठीक उसी तरह बांध दो जिस तरीके से तुमने बाकि के ऊँटो को बांधा है | फकीर के ये कहने पर व्यापारी ने थोडा खीजकर और हैरान होकर कहा लेकिन ‘रस्सी है कन्हा ?” इस पर फ़कीर ने कहा उसे तुम कल्पना की रस्सी से बांधो | व्यापारी ने ऐसा ही किया और उसने ऊँट के गले में अभिनय करते हुए काल्पनिक रस्सी का फंदा डालने जैसा व्यवहार किया और उसका दूसरा सिरा पेड़ से बांध दिया | ऐसा करते ही ऊँट बड़े आराम से बैठ गया|


व्यापारी चला गया सराय के अंदर और जाकर बड़े आराम से बेफिक्री की नींद सोया सुबह उठा और चलने की तयारी करी तो उसने बाकि के ऊँटो को खोला तो सारे ऊँट खड़े हो गये और चलने को तैयार हो गया लेकिन पांचवे ऊँट को हांकने के बाद भी वो खड़ा नहीं हुआ इस पर व्यापारी  गुस्से में आकर उसे मारने लगा लेकिन फिर भी ऊँट नहीं उठा इतने में कल वाला फ़कीर आया तो उसने कहा पागल इस बेजुबान को क्यों मार रहे हो अब | कल तुम ये बैठ नहीं रहा था तो परेशान थे और आज जब ये आराम से बैठा है तो भी तुमको परेशानी है इस पर व्यापारी ने कहा पर महाराज मुझे जाना है | फ़कीर ने कहा इसे खोलोगे तभी उठेगा न इस पर व्यापारी ने कहा मैंने कौनसा इसे बाँधा था मेने तो केवल बंधने का नाटक भर किया था तो फ़कीर कहने लगा जैसे कल तुमने इसे बाँधने का नाटक किया था वैसे ही अब खोलने केलिए भी नाटक करो | व्यापारी ने ऐसी ही किया और पलभर में ऊंट खड़ा हो गया |
अब फ़कीर ने पते की बात बोली कि जिस तरह ये ऊंट अदृश्य रस्सियों से बंधा है उसी तरह लोग भी पुरानी रुढियों से बंधे है और आगे बढ़ना नहीं चाहते है जबकि परिवर्तन प्रकृति का नियम है और इसलिए हमे रुढियों के विषय में ना सोचकर अपनी और अपने अपनों की खुशियों के बारे में सोचकर कभी कभी जिन्दगी के कुछ ऐसे नियम जो हमने नहीं बनाये है और उनके होने का औचित्य नहीं है उनके लिए थोडा soft corner रखना चाहिए जैसे कि प्रेम विवाह और विधवा विवाह जैसे मुद्दों पर कठोर नहीं होकर कोमलता से पेश आना चाहिए | जबकि अगर थोड़े उदार होते है चीजों के प्रति तो हम अपने साथ साथ दूसरो के लिए भी खुशियों के रास्ते खोलते है |

जिसमे सालों पहले यह सपना देखा था |


एक शहर (City ) में एक छोटा लड़का (young boy) रहा करता था अपने पिताजी के साथ और उसके पिता (father) जो है वो किसी बड़े आदमी के घोड़े के अस्तबल(Stable) में काम किया करते थे और वो देखता कि किस तरह उसके पिता पूरे दिन घोड़ों (Horses) के साथ रहते है और इतनी मेहनत करते है फिर भी उन्हें वो मान सम्मान कभी नहीं मिलता जो उस घोड़े के मालिक को है जिसके पास सेंकडों अच्छे घोड़े है और साथ ही वह समाज में खूब इज्जत और मान सम्मान भी पाता है | बचपन सपना देखने की उम्र होती है और जवानी उसे सच करने की और ऐसे ही उस लड़के ने भी सपना (Dream) देखना शुरू कर दिया कि एक दिन उसके पास भी इतनी ही दौलत होगी और उसके पास भी घोड़ों का एक बड़ा रेंच होगा जन्हा पर बहुत सारे घोड़े प्रशिक्षित किये जायेंगे और उनका मालिक भी बनेगा |
एक दिन स्कूल में सभी बच्चो से कहा गया कि वो लोग घर जाकर अगली सुबह एक लेख लिखकर लायेंगे जिसमे ये होगा कि वो बड़े होकर क्या करना चाहते है और क्या बनना चाहते है तो इस पर उस लड़के ने रात भर जागकर एक बहुत ही बेहतरीन लेख लिखा और साथ ही अपने सपने (dream) को उसमे पूरी तरह बताते हुए उसमे उसमे 200 एकड़ के अपने सपनों वाले रेंच की फोटो भी बना दी और लड़के ने पूरे मन के साथ वो निबंध लिखा और अगले दिन शिक्षक को दे दिया |
शिक्षक ने सभी कापियां जांचने के बाद परिणाम सुनाया तो लड़के को अजीब लगा क्योंकि उन्होंने उस लड़के द्वारा मेहनत से लिखे गये उस लेख के लिए कोई मार्क्स नहीं दिए थे और उस पर बड़े अक्षरों से फेल लिख दिया इस पर लड़के ने टीचर से वजह पूछी तो टीचर ने कहा बेहतर होता वो कोई छोटा मोटा लेख लिखता क्योंकि तुमने जो लिखा है वो पूरी तरह असम्भव है तुम लोगो के पास कुछ नहीं है इसलिए ऐसा सम्भव ही नहीं लेकिन फिर भी मैं तुम चाहो तो तुम्हे दूसरा मौका दे सकता हूँ | तुम इस निबंध को दुबारा लिखो और कोई वास्तविक लक्ष्य (Real Goal) बना लो मैं तुम्हे दोबारा नंबर देने के बारे में फिर से सोच सकता हूँ |
लड़का उस कॉपी को लेकर घर गया और उस पर काफी सोचा लेकिन उसे पूरी रात नींद नहीं आई अगले दिन वो टीचर के पास जाकर बोला आपको जो करना हो कर सकते है क्योंकि मेरा लेख यही है मैं इसे नहीं बदलना चाहता हूँ और अगर आप मुझे फेल करना चाहते है तो आप अपने फेल को कायम रखिये और मैं अपने सपने को कायम रखता हूँ |

बीस साल बाद वही शिक्षक कोई अंतर्राष्ट्रीय घुड़दौड़ देख रहा था तो दौड़ के पूरी हो जाने के बाद एक आदमी उनके पास आया और बड़े प्यार से उनको अपना परिचय दिया क्योंकि वह अपनी दुनिया में एक बहुत बड़ा नाम बन चूका था और यह वाही छोटा लड़का था जिसमे सालों पहले यह सपना देखा था |

तो ठीक इसी तरह से हमे अपनी जिन्दगी (life) के बारे में बहुत कुछ बदलना होता है हमे लक्ष्य (goal) निर्धारित करने हटे है और कुछ भी विचलित नहीं होना होता लोग इस बारे में आपसे बहुत कुछ कहते है लेकिन आपको अपने सपने (dream) को पूरा करने में ध्यान देना है और पूरी उर्जा के साथ आगे बढना होता है वही आपको अपनी कामयाबी के पास (dream come true) लेकर जाएगी |

बदलाव


जिन्दगी में बहुत सारे अवसर ऐसे आते है जब हम बुरे हालात का सामना कर रहे होते है और सोचते है कि क्या किया जा सकता है क्योंकि इतनी जल्दी तो सब कुछ बदलना संभव नहीं है और क्या पता मेरा ये छोटा सा बदलाव कुछ क्रांति लेकर आएगा या नहीं लेकिन मैं आपको बता दूँ हर चीज़ या बदलाव की शुरुआत बहुत ही basic ढंग से होती है | कई बार तो सफलता हमसे बस थोड़े ही कदम दूर होती है कि हम हार मान लेते है जबकि अपनी क्षमताओं पर भरोसा रख कर किया जाने वाला कोई भी बदलाव छोटा नहीं होता और वो हमारी जिन्दगी में एक नीव का पत्थर भी साबित हो सकता है | चलिए एक कहानी पढ़ते है इसके द्वारा समझने में आसानी होगी कि छोटा बदलाव किस कदर महत्वपूर्ण है |
एक लड़का सुबह सुबह दौड़ने को जाया करता था | आते जाते वो एक बूढी महिला को देखता था | वो बूढी महिला तालाब के किनारे छोटे छोटे कछुवों की पीठ को साफ़ किया करती थी | एक दिन उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची |
वो लड़का महिला के पास गया और उनका अभिवादन कर बोला ” नमस्ते आंटी ! मैं आपको हमेशा इन कछुवों की पीठ को साफ़ करते हुए देखता हूँ आप ऐसा किस वजह से करते हो ?”  महिला ने उस मासूम से लड़के को देखा और  इस पर लड़के को जवाब दिया ” मैं हर रविवार यंहा आती हूँ और इन छोटे छोटे कछुवों की पीठ साफ़ करते हुए सुख शांति का अनुभव लेती हूँ |”  क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचता जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए ये कछुवे तैरने में मुश्किल का सामना करते है | कुछ समय बाद तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते है इसलिए कवच को साफ़ करती हूँ |
यह सुनकर लड़का बड़ा हैरान था | उसने फिर एक जाना पहचाना सा सवाल किया और बोला “बेशक आप बहुत अच्छा काम कर रहे है लेकिन फिर भी आंटी एक बात सोचिये कि इन जैसे कितने कछुवे है जो इनसे भी बुरी हालत में है जबकि आप सभी के लिए ये नहीं कर सकते तो उनका क्या क्योंकि आपके अकेले के बदलने से तो कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा न |
महिला ने बड़ा ही संक्षिप्त लेकिन असरदार जवाब दिया कि भले ही मेरे इस कर्म से दुनिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा लेकिन सोचो इस एक कछुवे की जिन्दगी में तो बदल्वाव आयेगा ही न | तो क्यों हम छोटे बदलाव से ही शुरुआत करें |

अपनी 100 घंटे की जिंदगी से कई अनगिनत लोगों की जिंदगी बदल गया।



एक मासूम अपनी 100 घंटे की जिंदगी से कई अनगिनत लोगों की जिंदगी बदल गया। दरअसल, ब्रिटेन का सबसे युवा डोनर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बना है। दो साल पहले जन्मा टेडी महज सौ घंटे जीवित रहा था। उसकी किडनी, हार्ट वाल्व व अन्य अंग आठ जरूरतमंद मरीजों में लगाए जा चुके हैं।


यही नहीं, टेडी के माता-पिता की अपील के बाद मासूम से प्रेरणा लेकर एक लाख से ज्यादा लोगों ने अंग दान करने की प्रतिज्ञा ली है। बता दें कि टेडी अपने जुड़वा भाई के साथ पैदा हुआ था। डॉक्टरों ने मां जेस इवान्स को पहले ही बता दिया था कि उनकी कोख में पल रहे जुड़वा बच्चों में से एक को 'एनेंसेपाल बीमारी' है। इसमें शिशु के सिर और मस्तिष्क की अन्य हड्डियों का विकास नहीं होता है।


डॉक्टरों ने सलाह दी कि लाइलाज बीमारी से पिडि़त शिशु को कोख में ही खत्म करें लेकिन मां ने इनकार कर दिया। जेस और उनके पति माइक चाहते थे कि उनका बेटा कुछ मिनट ही सही, पर दुनिया में जरूर आए। आमतौर पर ऐसे बच्चे जन्म से पहले या तुरंत बाद मर जाते हैं, लेकिन टेडी ने पूरे सौ घंटे मौत से संघर्ष किया। अब उसका ज़ड़वा भाई अपना दूसरा जन्मदिन मना रहा है। वहीं परिवार टेडी को याद करके दुखी है तो यह संतोष भी है कि उनके बेटे ने इतने लोगों को जिंदगी दी।

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