Friday, April 29, 2016

हम उतना ही पाते है जितना किसी दूसरे को देने में हम समर्थ होते है.




एक दिन एक बच्चा अपनी माँ से नाराज हो जाता है तो जब उसे डांट दिया जाता है तो गुस्सा होकर वो घर से बाहर चला जाता है और घर से थोड़ी दूर एक पहाड़ी पर जाकर जोर से चिल्ला  कर बार बार  कहता है कि ” मैं तुमसे नफरत करता हूँ ” तो थोड़ी ही देर बाद उसे अपनी ही प्रतिध्वनी सुनाई देती है तो वो बच्चा जिसे नहीं पता कि ये आवाज क्यों आती है उसे लगता है कि उस तरफ भी कोई है जो उस से यही कह रहा है तो वो डर जाता है वापिस अपनी माँ के पास आकर पूरी बात बताता है तो उसकी माँ समझ जाती है और बच्चे को वापिस उसी पहाड़ी पर लेजाकर कहती है अब तुम ये कहो कि ” मैं तुमसे प्यार करता हूँ ” तो वो फिर वही आवाज गूंजी तो उसकी माँ ने कहा कि देखो तुमने जब ये कहा कि ” मैं तुमसे नफरत करता हूँ” तो सामने से भी तुम्हे यही सुनने को मिला लेकिन जन्हा तुमने अपनी नफरत को प्यार में बदल दिया वन्ही सामने वाले का नजरिया भी तुम्हारे लिए बदल गया |

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